भारत का क्विक-कॉमर्स सेक्टर अब अपने अगले चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। Blinkit, Zepto और Instamart जैसी कंपनियों ने देश के शहरी बाजार में तेज डिलीवरी के लिए बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। लेकिन डार्क स्टोर, ऑर्डर और GMV बढ़ाने के बाद अब सवाल यह है कि यह पूरा मॉडल कितनी मजबूती से मुनाफा पैदा कर सकता है।
इस बदलाव का सबसे स्पष्ट उदाहरण Blinkit है। Q1 FY27 में कंपनी के क्विक-कॉमर्स कारोबार का adjusted EBITDA ₹102 करोड़ सकारात्मक रहा। इस दौरान Blinkit के डार्क स्टोर्स की संख्या बढ़कर 2,443 हो गई और कंपनी ने 331 मिलियन ऑर्डर पूरे किए।

Instamart ने भी अपनी unit economics सुधारने की दिशा में प्रगति की है। जून तिमाही में उसका contribution margin लगभग -0.3 फीसदी रहा, जबकि कंपनी contribution break-even तक पहुंचने के बाद अब adjusted EBITDA break-even की ओर बढ़ रही है। विश्लेषकों के अनुसार इसके लिए monetisation, fulfilment efficiency और scale में आगे सुधार जरूरी होगा।
Zepto भी लागत घटाने और profitability की दिशा में बढ़ने की कोशिश कर रही है। Q4 FY26 में कंपनी का adjusted EBITDA loss करीब ₹1,247.5 करोड़ रहा था, जबकि उसके डार्क स्टोर की संख्या 1,139 थी।
इस पूरी तस्वीर से पता चलता है कि क्विक-कॉमर्स का अगला चरण growth at all costs से हटकर sustainable growth की ओर बढ़ रहा है। अब निवेशकों और बाजार के लिए ऑर्डर की संख्या के साथ-साथ प्रति ऑर्डर लागत, contribution margin और EBITDA जैसे आंकड़े भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।
