CAFE-III नियमों से इलेक्ट्रिक कारों को मिलेगा प्रोत्साहन, किफायती EV मॉडल लाने पर बढ़ सकता है कंपनियों का जोर

Local Samachaar
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भारत में इलेक्ट्रिक कारों के बाजार को आने वाले वर्षों में नए CAFE-III नियमों से प्रोत्साहन मिल सकता है। केंद्र सरकार ने पैसेंजर वाहनों के लिए ये नियम अधिसूचित कर दिए हैं। इन्हें 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा और ये मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे।

नए नियमों का मकसद कार कंपनियों की औसत ईंधन खपत कम करना और वाहनों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर अंकुश लगाना है। इसके लिए वाहन निर्माताओं को अपने पूरे पात्र पैसेंजर वाहन पोर्टफोलियो के औसत प्रदर्शन में सुधार करना होगा।

CAFE-III ढांचे में इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुपालन गणना के दौरान विशेष क्रेडिट का लाभ दिया गया है। इससे कंपनियों को अपनी बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल सकता है। हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों को भी नियमों में अलग-अलग तरह से प्रोत्साहन दिया गया है।

इस बदलाव के चलते वाहन निर्माता अपनी भविष्य की रणनीति में इलेक्ट्रिक कारों को अधिक महत्व दे सकते हैं। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, मारुति सुजुकी और एमजी जैसे ब्रांड अलग-अलग कीमतों और ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से नए मॉडल विकसित करने पर ध्यान दे सकते हैं।

अगर कंपनियां ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने के लिए किफायती EV मॉडल पेश करती हैं, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे ग्राहकों को कीमत, रेंज, चार्जिंग सुविधा और फीचर्स के मामले में अधिक विकल्प मिल सकते हैं।

हालांकि, नए नियम सीधे तौर पर कार कंपनियों को सस्ती EV बेचने के लिए बाध्य नहीं करते। इलेक्ट्रिक कार की कीमत बैटरी, उत्पादन लागत, तकनीक और बाजार की मांग जैसे कई कारकों से तय होती है। इसलिए किफायती मॉडल आने की संभावना को एक संभावित बाजार बदलाव के रूप में देखना चाहिए, न कि कीमत घटने की पक्की घोषणा के रूप में।

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