
कोर्ट ने कहा- नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं, केंद्र सरकार करेगी अंतिम फैसला।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने का मतलब यह नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई है। अदालत ने दोहराया कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग (ECI) के पास नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ प्रसेनजीत बोस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में SIR के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपीलों की सुनवाई की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में करीब 34 लाख अपीलें लंबित हैं। अब तक केवल लगभग 38 हजार मामलों का निपटारा हुआ है, जिनमें करीब 70 प्रतिशत अपीलें स्वीकार की गई हैं।
इस दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो चुनाव आयोग का दायित्व है कि वह मामला नागरिकता अधिनियम के तहत निर्णय के लिए केंद्र सरकार को भेजे। जब तक केंद्र अंतिम फैसला नहीं करता, तब तक केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी की नागरिकता समाप्त नहीं मानी जा सकती।
