भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कनाडा ने अपना बड़ा व्यापार मिशन भारत भेजा है। करीब 300 प्रतिनिधियों वाला यह दल 30 साल से अधिक समय में भारत आने वाला कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल बताया गया है। यह मिशन 12 से 17 अक्टूबर 2026 तक भारत में विभिन्न कारोबारी गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। दौरे में मुंबई और बेंगलुरु प्रमुख पड़ाव हैं। प्रतिनिधिमंडल भारतीय नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और संभावित कारोबारी साझेदारों के साथ संपर्क स्थापित कर नए व्यावसायिक अवसरों पर चर्चा कर रहा है।
किन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग?
भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक साझेदारी को कई क्षेत्रों में विस्तार देने की संभावनाएं हैं। दोनों देशों की सरकारें व्यापार और निवेश के साथ कृषि-खाद्य क्षेत्र, ऊर्जा, तकनीक और अन्य कारोबारी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रही हैं।
व्यापार मिशन का उद्देश्य केवल मौजूदा व्यापार को बढ़ाना नहीं, बल्कि कंपनियों के बीच नई साझेदारियां बनाना और दीर्घकालिक निवेश के अवसर विकसित करना भी है।
CEPA से व्यापार को मिल सकती है नई दिशा
भारत और कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार और निवेश के रास्ते में आने वाली बाधाओं को कम करना तथा कारोबारी संबंधों को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
कनाडा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 30.4 अरब डॉलर था। कनाडा ने 2030 तक इसे 70 अरब डॉलर सालाना करने का लक्ष्य रखा है।
दोनों देशों ने 2026 के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, व्यापार मिशन और बातचीत की प्रगति के बावजूद समझौते पर अंतिम सहमति होना अभी जरूरी है।

