54 दिन की जांच, 1000 पन्नों की चार्जशीट और 126 तारीखें, ऐसे सौरभ हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को मिली सजा

Local Samachaar
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मेरठ। मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस चर्चित मामले में पुलिस की जांच से लेकर अदालत के फैसले तक कई चरणों से गुजरना पड़ा। पुलिस ने 54 दिन की जांच के बाद करीब 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था। मुकदमे में 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए और कुल 126 तारीखों पर सुनवाई हुई।

30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई हुई और दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

पुलिस ने जुटाए थे साक्ष्य

सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में हुई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र किए और विस्तृत आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया। लगभग 1,000 पन्नों की चार्जशीट में जांच से संबंधित सामग्री शामिल थी।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत में साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।

126 तारीखों के बाद आया फैसला

मामले में कुल 126 सुनवाई हुईं। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को सजा के सवाल पर अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया।

14 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच करीब 45 मिनट तक बहस हुई। मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देकर रहम की अपील की। बचाव पक्ष ने उसके माता-पिता और पारिवारिक परिस्थितियों को भी अपनी दलील का हिस्सा बनाया।

अदालत ने सुनाई मृत्युदंड की सजा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया। यह फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव है। हालांकि, मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी कानून के तहत आगे की अपील और न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया उपलब्ध रहती है।

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