वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए एक राहत भरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन कार्य अब पूरी तरह बंद रहेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर खनन जारी रहा तो यह न केवल वन्यजीवों बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी खतरा बन जाएगा।
यह फैसला उस वक्त आया जब झारखंड के कुछ क्षेत्रों में खनन कार्य वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं के बेहद करीब चल रहे थे। अदालत ने माना कि खनन से उत्पन्न शोर, धूल और कंपन से जानवरों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है और यह उनके अस्तित्व के लिए खतरा है।
कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा कि वे तत्काल इको सेंसिटिव जोन तय करें, खनन लाइसेंस रद्द करें और पर्यावरण सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू करें। साथ ही अदालत ने यह भी दोहराया कि किसी भी प्रकार का विकास कार्य या निर्माण इस क्षेत्र में नहीं किया जाएगा।
यह फैसला पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है क्योंकि इससे अब देशभर में लगभग सभी संरक्षित वन क्षेत्रों को एक समान कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

