नोवगाम पुलिस स्टेशन का शुक्रवार की रात का मंजर दिल दहला देने वाला था। फरीदाबाद से बरामद भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों की जांच कर रही टीम अचानक हुए धमाके की चपेट में आ गई।
यह वही विस्फोटक थे जो पिछले महीने जम्मू-कश्मीर में सामने आए व्हाइट-कलर टेरर मॉड्यूल के खुलासे के दौरान पकड़े गए थे। इस मॉड्यूल ने पुलिस को चौंका दिया था क्योंकि इसमें डॉक्टर, पैरामेडिक और शिक्षित युवा शामिल थे।
मुख्य आरोपी — डॉ. मुज़म्मिल गंऐ, उमर नबी और मुझफ़्फर रदर — के ठिकानों से मिले विस्फोटकों के नमूने विस्तृत जांच के लिए श्रीनगर लाए गए थे। इन्हीं नमूनों की जांच करते समय अचानक विस्फोट हो गया, जिससे पुलिस स्टेशन परिसर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। घायल पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
इस हादसे ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं —
- इतने संवेदनशील विस्फोटकों को पुलिस स्टेशन में क्यों रखा गया?
- क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ?
- क्या विस्फोट नमूनों की रासायनिक प्रतिक्रिया का नतीजा था?
जांच टीमें इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही हैं, ताकि ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो सके।

