एक माँ की चीखें, एक घर का दर्द: नेपाल की सड़कों पर लोकतंत्र की आग में जली मासूम ज़िंदगी

नेपाल की धरती इस समय मातम में डूबी हुई है। राजनीतिक अस्थिरता और जनआंदोलन ने ऐसा भयावह रूप ले लिया है कि निर्दोष ज़िंदगियाँ इसकी आग में झुलस रही हैं।
डल्लु (काठमांडू) में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री झलानाथ खनाल के घर को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। उस समय उनकी पत्नी, राज्यलक्ष्मी चित्रकार, घर के अंदर मौजूद थीं। आग की लपटों ने उन्हें घेर लिया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
राज्यलक्ष्मी चित्रकार का जाना इस आंदोलन का सबसे दुखद पहलू बन गया है। उनकी मृत्यु केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि यह याद दिलाती है कि जब राजनीतिक असंतोष हिंसा में बदलता है तो सबसे ज्यादा चोट आम नागरिकों को लगती है।
आज पूरा नेपाल स्तब्ध है। राष्ट्रपति ने सभी से शांति की अपील की है, लेकिन राजधानी की सड़कों पर गुस्सा अब भी उबाल मार रहा है। प्रधानमंत्री ओली को अंततः पद छोड़ना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हिंसा की गूंज सुनाई दे रही है।




