हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को अक्सर ज्यादा नमक खाने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, रक्तचाप पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। किसी व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, शारीरिक गतिविधि, नींद और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी उच्च रक्तचाप के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, उच्च रक्तचाप का पता केवल नियमित जांच से लगाया जा सकता है, क्योंकि बहुत से लोगों को शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह हृदय, मस्तिष्क और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
कौन-से कारक बढ़ा सकते हैं जोखिम?
- नींद की समस्या: लगातार अपर्याप्त नींद और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियां रक्तचाप से संबंधित हो सकती हैं।
- तनाव: तनाव के दौरान ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। इसके साथ जुड़ी खराब नींद और अस्वस्थ आदतें भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
- शारीरिक निष्क्रियता: नियमित व्यायाम की कमी और ज्यादा समय बैठे रहने की आदत उच्च रक्तचाप के जोखिम से जुड़ी है।
- कैफीन का सेवन: कॉफी, चाय और अन्य कैफीनयुक्त पेय कुछ लोगों में थोड़े समय के लिए रक्तचाप बढ़ा सकते हैं।
- शराब और तंबाकू: शराब का अधिक सेवन तथा तंबाकू का इस्तेमाल हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
- कुछ दवाएं: कुछ दर्द निवारक, डीकंजेस्टेंट यानी नाक बंद होने की समस्या में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और कुछ अन्य औषधियां रक्तचाप को प्रभावित कर सकती हैं।
- मोटापा और दूसरी बीमारियां: अधिक वजन, किडनी की समस्याएं और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी रक्तचाप बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं।
बीपी नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?
नमक का सेवन सीमित रखें और फल-सब्जियों सहित संतुलित आहार अपनाएं। नियमित शारीरिक गतिविधि करें, पर्याप्त नींद लें, तनाव को संभालने के तरीके अपनाएं और शराब से बचें या उसका सेवन सीमित करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर की जांच और उपचार जारी रखें।
ध्यान रखें कि उच्च रक्तचाप का कोई एक कारण हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता। यदि आपका बीपी बार-बार बढ़ रहा है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराएं।

