Retirement Planning: रिटायरमेंट फंड कितने साल चलेगा? कॉर्पस और निकासी दर का रखें ध्यान

Local Samachaar
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रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने के लिए केवल अच्छी-खासी बचत जमा कर लेना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि उस रकम का इस्तेमाल कितनी गति से किया जा रहा है। यदि हर साल जरूरत से अधिक पैसा निकाला जाता है, तो रिटायरमेंट कॉर्पस जल्दी समाप्त हो सकता है। दूसरी ओर, बहुत कम निकासी करने से भी जरूरी खर्चों और जीवनशैली पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से रिटायरमेंट प्लानिंग में पर्याप्त कॉर्पस, नियंत्रित निकासी दर और सही एसेट एलोकेशन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कितनी होनी चाहिए निकासी दर?

निकासी दर का अर्थ है कि रिटायरमेंट के बाद हर साल कुल निवेश में से कितनी रकम खर्च के लिए निकाली जा रही है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का निवेश कॉर्पस 1 करोड़ रुपये है और वह साल में 4 लाख रुपये निकालता है, तो शुरुआती निकासी दर 4 प्रतिशत होगी। यह केवल गणितीय उदाहरण है, किसी व्यक्ति के लिए सुरक्षित निकासी दर की गारंटी नहीं।

वास्तविक निकासी दर तय करते समय निवेश पर मिलने वाले रिटर्न, महंगाई, टैक्स, उम्र, अन्य आय और रिटायरमेंट के बाद संभावित जीवनकाल को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में गिरावट के शुरुआती वर्षों में लगातार बड़ी रकम निकालने से कॉर्पस पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

एसेट एलोकेशन का क्या है महत्व?

एसेट एलोकेशन का मतलब है कि निवेश को अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में कैसे बांटा गया है। रिटायरमेंट के बाद पूरी रकम को एक ही विकल्प में रखने के बजाय जरूरत, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार संतुलित योजना बनाई जा सकती है।

निवेश में बहुत अधिक जोखिम लेने से पूंजी में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जबकि पूरी रकम को ऐसे विकल्पों में रखना जिनका रिटर्न महंगाई से कम हो, लंबे समय में खरीदने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सुरक्षा, नियमित आय और लंबी अवधि की वृद्धि के बीच संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है।

तीन-बकेट स्ट्रेटजी से मिल सकती है मदद

इस रणनीति में निकट भविष्य के खर्च, मध्यम अवधि की जरूरतों और लंबी अवधि के निवेश को अलग-अलग रखा जाता है। इससे रोजमर्रा के खर्चों के लिए उपलब्ध रकम और दीर्घकालिक निवेश के बीच स्पष्ट अंतर बना रहता है।

हालांकि, बकेट में रकम का अनुपात व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार तय होना चाहिए। पेंशन या किराये जैसी नियमित आय वाले व्यक्ति की जरूरतें उस व्यक्ति से अलग हो सकती हैं, जिसकी आय का मुख्य स्रोत रिटायरमेंट कॉर्पस ही है।

मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग तैयारी

बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्च बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए रिटायरमेंट की योजना में स्वास्थ्य बीमा, आपातकालीन बचत और आसानी से उपलब्ध धन को शामिल करना चाहिए। समय-समय पर खर्चों और निवेश की समीक्षा करने से बदलती जरूरतों के अनुसार योजना में बदलाव किया जा सकता है।

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