अगर आपकी सुबह की शुरुआत सूरज की रोशनी से होती है तो यह सिर्फ आपको जगाने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक प्रकाश शरीर की सर्केडियन क्लॉक को दिन और रात के चक्र के साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है।
एंड्रयू ह्यूबरमैन के अनुसार, सुबह उठने के बाद प्राकृतिक रोशनी आंखों के जरिए दिमाग तक एक महत्वपूर्ण संकेत पहुंचाती है। इससे शरीर को दिन के समय का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है और बाद में रात में सोने की प्रक्रिया के लिए जैविक लय तैयार होती है।

NIH भी बताता है कि सूरज की रोशनी जैसे-जैसे आंखों तक पहुंचती है, शरीर में दिन के समय से जुड़े हार्मोनल बदलाव होते हैं। सुबह की रोशनी शरीर को जागने की अवस्था में लाने में मदद करती है, जबकि रात में कम रोशनी मेलाटोनिन के प्राकृतिक चक्र के लिए जरूरी है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ दिन के समय प्राकृतिक रोशनी लेने और रात में तेज कृत्रिम रोशनी तथा स्क्रीन एक्सपोजर कम करने की सलाह देते हैं। एक नियमित प्रकाश-अंधकार चक्र नींद और सर्केडियन रिदम के बेहतर तालमेल में मदद कर सकता है।
