उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को साधने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद राज्य सरकार में OBC मंत्रियों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई जा रही है। भाजपा ने इस बदलाव के जरिए पिछड़े वर्गों को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने पारंपरिक वोट बैंक को और मजबूत करना चाहती है। इसी वजह से पार्टी ने विभिन्न OBC समुदायों से आने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में प्रमुख स्थान दिया है। इससे सरकार में सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी मजबूत करने की कोशिश की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में OBC वोट बैंक चुनावी परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा की यह रणनीति विपक्षी दलों के लिए चुनौती बन सकती है। विपक्ष ने हालांकि इस फैसले को केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया है।

