
शिक्षक दिवस का इतिहास डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से जुड़ा है, जिनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु में हुआ था। वह भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति बने।
उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया और कोलकाता तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया और उन्हें 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया।
1962 में राष्ट्रपति बनने के बाद जब उनके छात्रों ने उनके जन्मदिन को विशेष रूप से मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा कि इस दिन को सभी शिक्षकों को समर्पित किया जाना चाहिए। इसी से भारत में शिक्षक दिवस की शुरुआत हुई।
आज भी यह दिन शिक्षकों के योगदान और उनके मार्गदर्शन को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है।




