सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही देशभर में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मनाया जा रहा है। यह दिन विशेष रूप से दान-पुण्य, स्नान और सूर्य उपासना के लिए जाना जाता है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग सुबह-सुबह नदी और तालाबों में स्नान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
हालांकि, इस वर्ष पंचांगों में मतभेद के कारण कई ज्योतिषाचार्य 15 जनवरी 2026 को ही मुख्य पुण्यकाल बता रहे हैं। उनके अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश देर रात होने के कारण धार्मिक दृष्टि से अगले दिन स्नान-दान करना अधिक फलदायी रहेगा।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में खिचड़ी, तिल-लड्डू और गुड़ का विशेष महत्व है। वहीं पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी और मकर संक्रांति के मेल से उत्सव और भी रंगीन हो गया है।
दक्षिण भारत में पोंगल पर्व के माध्यम से किसान अपनी फसल की खुशी मनाते हैं। घरों के सामने कोलम (रंगोली) बनाई जाती है और पारंपरिक गीत-संगीत के साथ त्योहार मनाया जाता है।

